Dedicated to "The one"
वो एक शख्स जो मुझसे महोब्बत नहीं करता,
शायद हस्ता है मुझ पर नफरत भी नही करता,
उस रोज जब मैं धूप में खड़ी थी वो वही था जिसकी परछायी मुझ पे पड़ी थी, कुर्सी पर बैठे उसकी निगाहें अखबार पढ़ रही थी,औऱ मेरी गुस्ताख़ निगाहे उस पर ही अड़ी थी।
उस रोज जब वो chetak पर आया तो इसा लगा मानो स्कूटर नही घोड़े का हो साया।
उसे वक़्त का तकाज़ा नही ड़ेढ साल मे हुआ भी कुछ ज्यादा नही ,होंगे उसके फैन बहुत से पर यकीन मानो एक तरफा मोहोब्बत का उसे भी अन्दाजा नहीं।।